सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के कारण और चयनित योगाभ्यासों की अवधारणा

 

Lalit Mohan1, Akhilesh Kumar Singh2

1Ph.D Scholar, SAM Global University, Bhopal MP.

2Dean, Research and Development, SAM Global University, Bhopal MP.

*Corresponding Author E-mail:

 

ABSTRACT:

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस ग्रीवा (गर्दन) के आसपास के मेरुदंड की हड्डियों की असामान्य बढ़ोतरी और सर्वाइकल वेर्टेब्रा के बीच के कुशनों इंटरवर्टेबल डिस्क में कैल्शियम का डी-जेनरेशन] बहिःक्षेपण तथा सर्वाइकल क्षेत्र में फुलाव अथवा सूजन और अपने स्थान से सरकने की वजह से होता है। लगातार लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर बैठे रहना मोबाइल फोन पर गर्दन झुकाकर देर तक बात करना और फास्ट-फूड्स जंक-फूड्स का सेवन इस मर्ज के होने के कुछ प्रमुख कारण हैं।1] प्रौढ़ और वृद्धों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस मेरुदंड में डी-जेनरेटिव बदलाव क्रिया है। वेर्टेब्रा के बीच के कुशनों के डी-जेनरेशन से नस पर दबाव पड़ता है और इससे सर्विकल स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण दिखते हैं। यह समस्या स्पाइन के सबसे उपरी भाग सर्वाइकल स्पाइन में होती है। सामान्यतः 4वीं5वीं] 5वीं6छठी] छठी7वीं के बीच डिस्क का सर्वाइकल वेर्टेब्रा अधिक प्रभावित होता है। योगासन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वरदान स्वरूप हैं क्योंकि इससे शरीर के समस्त भागों पर प्रभाव पड़ता है और वह अपने कार्य सुचारु रूप से करते हैं। ये रोग विकारों को नष्ट करते हैं रोगों से रक्षा करते हैं शरीर को निरोग स्वस्थ एवं बलिष्ठ बनाए रखते हैं।2] सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस को ठीक करने वाली कोई दवा नहीं है। हालाँकि नियमित योगाभ्यास से इस रोग का निदान संभव है

 

KEYWORDS: योग] सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस] गर्दन का र्द और अकड़न] मांसपेशिया कशेरुका

 

 


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जीवन को निरंतर वह सुचारू रूप से चलायमान बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंग स्वास्थ्य का है जिसमें मनुष्य के प्रतिदिन कार्य करने की गुणवत्ता का स्थान सर्वोपरि है वर्तमान में विभिन्न व्यक्तियों में अनेक प्रकार की पीड़ा दर्द प्रचलन में शामिल हो चुके हैं। जिसमें से गर्दन का दर्द एक मुख्य समस्या है। रोग चिकित्सा में डाक्टरों और अस्पतालों द्वारा अक्सर सर्वाइकल शब्द का प्रयोग होता है जिसका सामान्य मतलब है गर्दन से सम्बंधित। सर्वाइकल का शाब्दिक अर्थ ग्रीवा अर्थात गर्दन है तथा स्पॉन्डिलाइटिस दो यूनानी शब्द स्पॉन्डिल तथा आइटिस से मिलकर बना है स्पॉन्डिल का अर्थ है वर्टिब्रा तथा आइटिस का अर्थ सूजन होता है इसका मतलब वर्टिब्रा अर्थात रीढ़ की हड्डी में सूजन की शिकायत को ही स्पॉन्डिलाइटिस कहा जाता है। हमारे मेरुदंड के क्षेत्र में 33 वेर्टेब्रा होते हैं जिसका मुख्य भाग सर्वाइकल ग्रीवा का क्षेत्र है यह वह भाग है जो सर को धड़ से जोड़ता है इस क्षेत्र में 7 वेर्टेब्रा या कशेरुका होती है lh&1 से lh&7 जो आपस में डिस्क के साथ जुडी होती हैं जिनके मदद से हम गर्दन को इधर&उधर घूमना ऊपर&निचे घूमना आदि आसानी से करते हैं। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस सर्वाइकल स्पाइन की एक सामान्य अपक्षयी स्थिति है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्दन की हड्डियों डिस्क और जोड़ों में बदलाव होता है। यह इंटर-वर्टेब्रल डिस्क में उम्र से संबंधित परिवर्तनों के कारण होने की सबसे अधिक संभावना है। ये परिवर्तन उम्र बढ़ने के साथ&साथ होते हैं। जो प्रायः वृद्धो में अधिक देखे जाते हैं लेकिन वर्तमान में यह समस्या वृद्धो के साथ&साथ] व्यस्को तथा युवाओ में भी देखी जा रही है जिसका मुख्या कारण है अनुचित जीवन शैली उम्र के साथ हड्डियां और स्नायुबंधन अपनी सामान्य ताकत खोने लगते हैं3 ग्रीवा रीढ़ की डिस्क धीरे-धीरे तरल द्रव पदार्थ खो देती है और सख्त हो जाती है। चिकित्सकीय रूप से कई अतिव्यापी और विशिष्ट सिंड्रोम देखे जाते हैं। इनमें गर्दन और कंधे का दर्द] सिरदर्द शामिल हैं।

 

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के वैकल्पिक नाम हैं सर्वाइकल ऑस्टियोआर्थराइटिस] सर्वाइकल] गर्दन का गठिया] सर्वाइकल का पुराना गर्दन दर्द] ग्रीवा ऑस्टियोआर्थराइटिस आदि।

 

स्पोंडिलोसिस और स्पॉन्डिलाइटिस के बीच अंतर:

स्पोंडिलोसिस के लक्षण आमतौर पर दो श्रेणियों में आते हैं अर्थात् स्थानीयकृत लक्षण और विकीर्ण लक्षण। स्पोंडिलोसिस के स्थानीयकृत लक्षण समस्या के स्थल पर लगभग आसपास होते हैं जिसमे हर्नियेटेड डिस्क और उनमें सुस्त दर्द सीमित गति या अस्थिरता की भावना शामिल हो सकती है। स्पोंडिलोसिस के विकीर्ण लक्षण शरीर के दूरस्थ क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं जैसे कि उभड़ा हुआ डिस्क और हड्डी के स्पर्स से प्रभावित होती हैं। स्पॉन्डिलाइटिस का अर्थ है एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस है जो महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है। स्पोंडिलोसिस के लक्षण आमतौर पर 50 साल की उम्र के बाद शुरू होते हैं दूसरी ओर स्पॉन्डिलाइटिस आमतौर पर युवा वयस्कों और किशोरों में विकसित होता है] इसके लक्षण 20 से 40 की उम्र से दिखने लग जाते हैं और जब यह चरम अवस्था में पहुंचता है तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और रीढ़ वास्तव में फ्यूज हो सकती है] जिससे चलना मुश्किल और बहुत दर्दनाक हो सकता है।4] दोनों हड्डियों की स्थिति के बीच महत्वपूर्ण अंतर यह है कि वे हड्डी को नुकसान पहुंचाते हैं। स्पॉन्डिलाइटिस के मामले में जोड़ों में सूजन का निदान किया जाता है। दूसरी ओर स्पोंडिलोसिस के मामले में हड्डियों के अध पतन] सामान्य घिसने का निदान किया जाता है।

 

कारण:

लगातार लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर बैठे रहना] गर्दन झुकाकर देर तक मोबाइल फोन का प्रयोग करना] पढ़ते या काम करते समय गर्दन का पॉस्चर सही नहीं रखना और फास्ट-फूड्स जंक-फूड्स का सेवन] इस मर्ज के होने के कुछ प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा अधिक लम्बे समय तक ड्राइविंग करना] अधिक लम्बे समय तक गद्दीदार कुर्सियों पर समय व्यतीत करना] कैल्शियम की कमी] विटामिन डी की कमी] घर में काम करती महिलाओं में] सिलाई-कढ़ाई करते लोगो में] यह गंभीर तनाव और चिंता के कारण भी हो सकती है। प्रौढ़ और वृद्धों में सर्वाइकल मेरुदंड में डी-जेनरेटिव बदलाव] उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियों का क्षय या विकार] कमजोर हड्डियां साधारण क्रिया है।

 

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के जोखिम कारकों में शामिल हैं:

·         उम्र: उम्र बढ़ने के साथ&साथ स्पाइनल डिस्क डिहाइड्रेट और सिकुड़ने लगती हैं।

·         पेशा: कुछ काम गर्दन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं जैसे& झुक कर घंटों तक लैपटॉप आदि पर काम करते लोगो में] अत्यधिक भारी वजन उठाना] कामकाजी महिलाओं में] सिलाई कढ़ाई करते लोगो में] अत्यधिक ड्राइविंग करते लोगो में।

·         गर्दन की चोटें: गर्दन में लगी कोई चोट] चाहे सालों पुरानी हो।

·         स्थायी विकलांगता: सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण] यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो रीढ़ की हड्डी को स्थायी नुकसान हो सकता है] जिससे स्थाई विकलांगता सकती है।

·         आनुवंशिक कारक: कुछ परिवारों में समय के साथ अधिक परिवर्तन होंगे] जबकि अन्य परिवारों का विकास कम होगा।

 

लक्षण:

एक अनुमान के अनुसार हर पांचवें भारतीय को स्पाइन से संबंधित किसी किसी प्रकार की समस्या है। पहले ये समस्याएं केवल उम्रदराज लोगों में ही होती थी लेकिन पिछले एक दशक में युवाओं में इसके मामले 60 प्रतिशत तक बढ़े हैं। लंबे समय तक गलत पॉस्चर बनाए रखना स्पाइन पर अत्यधिक दबाव डालता है। युवाओं में ही नहीं] बच्चों और किशोरों में भी गैजेट्स के अत्यधिक इस्तेमाल से सर्वाइकल स्पाइन से संबंधित समस्याएं हो रही हैं] जिसमें सर्वाइकल स्पॉन्डोलाइटिस प्रमुख है।5 सर्वाइकल क्षेत्र मे कैल्शियम का डी-जेनरेशन] बहिःक्षेपण और सर्वाइकल क्षेत्र में फुलाव अथवा सूजन की अवस्था तथा अपने स्थान से सरकने की वजह से होता है। वेर्टेब्रा के बीच के कुशनों के डी-जेनरेशन से नसों पर दबाव पड़ता है और इससे सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के लक्षण दिखते हैं। सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के निम्न लक्षण हैं] जैसे& गर्दन में दर्द होना] दर्द के साथ चक्कर आना] गर्दन में दर्द के साथ बाजू में दर्द होना] गर्दन में अकड़न जो उत्तरोत्तर बिगड़ती जाती है] गर्दन में सूजन तथा हाथों का सुन्न हो जाना] हाथों में दर्द] झुनझुनाहट का होना] सिरदर्द] विशेष रूप से सिर के पिछले हिस्से में] अंग विशेष में भारीपन का एहसास होना] सुई के चुभने जैसे पीड़ा होना] मांसपेशियों में ऐंठन] मांसपेशियों में कमजोरी] अकड़न और सिकुड़ जाना। यहां तक गर्दन के आसपास की नसों में दर्द या सूजन का फैल जाना आदि। जब उम्र और समय के साथ लक्षण बढ़ते जाते हैं अगर उचित समय पर उपचार किया जाय तो] चलना- फिरना भी मुश्किल हो सकता है।

 

योगाभ्यासों की अवधारणा:

उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति मनुष्य की अमूल्य निधि है जिसके आधार पर मनुष्य जीवन के सभी उद्देश्यों को परिपूर्ण करने के लिए कुछ कुछ कर्म करता ही रहता है। सांसारिक मनुष्य सदैव सुख की कामना करता है तथा सुख की प्राप्ति के बिना समग्र स्वास्थ्य की प्राप्ति संभव नहीं है। योग का पारमार्थिक लाभ देखा जाय तो यह परमात्मा के साथ एक होने की अच्छी कला है] लेकिन योग के व्यावहारिक लाभ को भी देखा जाय तो यह शारीरिक एवं मानसिक रोगों को दूर करने के लिए एक उत्तम चिकित्सा पद्धति है। आज प्रत्येक मनुष्य अपने स्वास्थ्य एवं दीर्घ जीवन के लिए सतत् प्रयत्नशील है। लेकिन भौतिकवादी दृष्टिकोण ने मनुष्य मात्र को प्रकृति एवं प्राकृतिक जीवन शैली से दूर कर दिया है। वर्तमान समय में मनुष्य अनेकानेक रोग कष्टों से ग्रस्त होता जा रहा है] जिसमें से अधिकाँश का कारण तनाव ही है।

 

योग क्रियाओं द्वारा रोग निवारण करना ही योग चिकित्सा कहलाती है। आसन] प्राणायाम आदि समस्त योग क्रियाओं का उपयोग कर विभिन्न रोगों की चिकित्सा करना ही यौगिक चिकित्सा का उद्देश्य है। सामान्य शब्दों में कहा जाय तो यौगिक संसाधनों का वह समूह] यौगिक सूक्ष्म व्यायाम] आसन] प्राणायाम] मुद्रा] ध्यान आदि जिससे व्याधि की अवस्था से रोगी को स्वस्थ अवस्था में लाने हेतु सतत् प्रयास किया जाता है] वह यौगिक चिकित्सा अर्थात् योग चिकित्सा कहलाती है।

प्राचीन ग्रन्थों में रोगोपचार की विभिन्न विधायें वर्णित हैं। आज सम्पूर्ण विश्व योग एवं उसके चिकित्सकीय उपयोग के विषय में जानने के इच्छुक हैं।

 

प्रयोजनं चास्य स्वस्थस्य स्वास्थ्यरक्षणं आतुरस्यविकारप्रशमनं &चरकसंहिता 30@266

आयुर्वेद शास्त्र के अनुरुप ही यौगिक चिकित्सा का उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा एवं रोगी व्यक्ति के रोग की निवृत्ति है।

 

योग के आसन दसरे शारीरिक आसनों की अपेक्षा लंबे शोध और प्रयोग के बाद रोग] शरीर विज्ञान के अनुसर निर्मित किए गए हैं। यह हमें हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों की देन है] ऋषि मुनियों ने योगासन का आविष्कार रोगो को दूर कर लंबी आयु के लिए किया था] क्योंकि वे स्वस्थ रहकर ज्यादा से ज्यादा जीवन जीना चाहते थे। ताकि मोक्ष की प्राप्ति की जा सके। योग के आसनों द्वारा कोई सा भी रोग दूर किया जा सकता है। किसी भी व्यक्ति को रोगी बनाकर जल्दी ही मृत्यु की ओर धकेलने वाले शारीरिक मल और जहर को दूर कर योग एक स्वस्थ और शक्तिशाली जीवन प्रदान करता है।7

 

आधुनिक युग में योग का महत्व और अधिक बढ़ गया है। इसके बढ़ने का कारण व्यस्तता और मन की व्यग्रता है। आज आधुनिक मनुष्य को योग की ज्यादा आवश्यकता है] जबकि मन और शरीर अत्यधिक तनाव] वायु प्रदूषण तथा भागमभाग के जीवन से रोगग्रस्त हो चला है। योगासनों के माध्यम से शारीरिक शक्तियों का विकास किया जा सकता है। शरीर को हृष्ट-पुष्ट बनाने] उसके अंग प्रत्यंगो की कार्यक्षमता करने तथा उसे निरोग बनाये रखकर ओजस्वी एवं कांतिमय बनाने में योग साधना का अधिक महत्व है। शरीर में विभिन्न द्रव्यों का निर्माण करने वाली ग्रंथियों को ठीक प्रकार नियंत्रित कर उन्हें पर्याप्त रूप से सजग एवं क्रियाशील बनाये रखने में योग के द्वारा पूर्ण सहायता प्राप्त होती है। योग का महत्व श्वेताश्वतर उपनिषद में इस प्रकार वर्णित किया गया है-

 

तस्य रोगो जरा मृत्युः प्राप्तस्य योगाग्रिमयं शरीरम्&श्वेताश्वतर 2@128

अर्थात् योगाभ्यास से तपा हुआ शरीर रोग] जरा एवं मृत्यु से मुक्त हो जाता है।

योग से शरीर मजबूत और लचीला होता है। योग मांसपेशियों को सुगठित और शरीर को संतुलित रखता है] सुगठित और संतुलित और लोचदार शरीर होने से कार्य क्षमता में भी वृद्धि होती है। कुछ योग मुद्राओं से शरीर की हड्डियां भी पुष्ट और मजबूत होती हैं। यह अस्थि सम्बन्धी रोग की संभावनाओं को भी कम करता है। अतः योग चिकित्सा पद्धति सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की स्थिति के लिए सरल] प्रभावशाली और स्थाई उपचार प्रदान करता है।

 

अध्ययन का उद्देश्य:

·         सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के कारक कारकों का अध्ययन और विश्लेषण करना।

·         सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के निदान के लिए निहितार्थ विभिन्न योगाभ्यासों का उनके लाभों के संदर्भ में अध्ययन करना।

·         सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस पर चयनित योगाभ्यासों के संयुक्त प्रभाव का पता लगाना।

 
विभिन्न साहित्यो में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में अनेक योगाभ्यासों का परामर्श दिया जाता है इसमें चयनित इस प्रकार है:
स्कंध चक्र सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध पृष्ठ 43&44 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में स्कंध चक्र का वर्णन है
 
ग्रीवा संचालन सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध पृष्ठ 44&46 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में ग्रीवा संचालन का वर्णन है
 
गोमुखासन सम्बन्धी स्वामी निरंजनानंद सरस्वती] घेरण्ड संहिता महर्षि घेरण्ड की योग शिक्षा पर भाष्य पृष्ठ 147&148 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में गोमुखासन का वर्णन है
 
वियोगासन सम्बन्धी राजीव जैन त्रिलोक] सम्पूर्ण योग विद्या पृष्ठ 209 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस  मेरुदंड तथा कंधों की जकड़न] के उपचार में वियोगासन का वर्णन है
 
मकरासन सम्बन्धी स्वामी निरंजनानंद सरस्वती] घेरण्ड संहिता महर्षि घेरण्ड की योग शिक्षा पर भाष्य पृष्ठ 192&193 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार तथा सम्पूर्ण शरीर के शिथिलीकरण के लिए मकरासन का वर्णन है
उष्ट्रासन सम्बन्धी स्वामी रामदेव] योग साधना एवं योग चिकित्सा रहस्य पृष्ठ 84 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में उष्ट्रासन का वर्णन है
 
मार्जरी आसन सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध पृष्ठ 123&124 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में मार्जरी आसन का वर्णन है
 
बालासन सम्बन्धी स्वामी रामदेव] योग साधना एवं योग चिकित्सा रहस्य पृष्ठ 68 में सम्पूर्ण शरीर के शिथिलीकरण के लिए बालासन का वर्णन है
 
सरल धनुरासन सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध पृष्ठ 218&219 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में सरल धनुरासन का वर्णन है
 
सर्पासन सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध पृष्ठ 210&211 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में सर्पासन का वर्णन है
 
मत्स्य क्रीड़ासन सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध पृष्ठ 94&95 में शरीर के स्नायुओं के शिथिलीकरण के लिए मत्स्य क्रीड़ासन का वर्णन है
 
मर्कटासन सम्बन्धी आचार्य बालकृष्ण दैनन्दिन योगाभ्यासक्रम पृष्ठ 53&55 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में मर्कटासन का वर्णन है
 
शवासन सम्बन्धी डॉ पी डी शर्मा योगासन-प्राणायाम कीजिए और निरोगी रहिए पृष्ठ 46&47 में सम्पूर्ण शरीर के शिथिलीकरण के लिए शवासन का वर्णन है
डॉक्टर स्वामी कर्मानंद सरस्वती] प्रत्यक्ष मार्गदर्शन स्वामी सत्यानंद सरस्वती] रोग और योग] पृष्ठ 179 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में शवासन का परामर्श दिया गया है
 
नाड़ी शोधन प्राणायाम सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध पृष्ठ 400&407 में सम्पूर्ण शरीस्थ नाड़ियों के शुद्धिकरण में नाड़ीशोधन का वर्णन है
डॉक्टर स्वामी कर्मानंद सरस्वती] प्रत्यक्ष मार्गदर्शन स्वामी सत्यानंद सरस्वती] रोग और योग] पृष्ठ 179 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में नाड़ी शोधन प्राणायाम का परामर्श दिया गया है
 
भ्रामरी प्राणायाम सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध पृष्ठ 412&414 में तनाव] चिंता] क्रोध तथा शरीरस्थ उत्तको के स्वास्थ्य लाभ में भ्रामरी प्राणायाम का वर्णन है
डॉक्टर स्वामी कर्मानंद सरस्वती] प्रत्यक्ष मार्गदर्शन स्वामी सत्यानंद सरस्वती] रोग और योग] पृष्ठ 179 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में भ्रामरी प्राणायाम का परामर्श दिया गया है
 
वायु मुद्रा सम्बन्धी डॉ बृज भूषण गोयल] प्राकृतिक स्वास्थ्य एवं योग पृष्ठ 218 में वायु रोग] वायुशूल तथा शरीर में दर्द निवारण के लिए वायु मुद्रा का वर्णन है
 
अपान वायु मुद्रा सम्बन्धी डॉ बृज भूषण गोयल] प्राकृतिक स्वास्थ्य एवं योग पृष्ठ 219 में उदर वायु रोग तथा दर्द निवारण के लिए अपान वायु मुद्रा का वर्णन है
 
योग निद्रा सम्बन्धी स्वामी सत्यानंद सरस्वती] ध्यान तंत्र के आलोक में पृष्ठ 170&204 में तनाव] चिंता] क्रोध] अवसाद तथा सम्पूर्ण शरीर के शिथिलीकरण के लिए योग निद्रा का वर्णन है
डॉक्टर स्वामी कर्मानंद सरस्वती] प्रत्यक्ष मार्गदर्शन स्वामी सत्यानंद सरस्वती] रोग और योग] पृष्ठ 179 में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में योग निद्रा का परामर्श दिया गया है
 

चयनित योगाभ्यासों की चयन रचना कुछ इस प्रकार किया गया है जिसमें हर दो आसन के पश्चात एक शिथिलीकरण रिलैक्सेशन आसन का प्रयोग किया गया है] प्रत्येक आसन में 30 सेकंड से 1 मिनट का अंतराल दिया गया है और प्रत्येक प्रशिक्षण सत्र के अंत में प्रशिक्षण समूह को 5 मिनट के लिए योग निद्रा] ध्यान में स्थिर के लिए निर्देशित किया जायेगा सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के निदान में चयनित योगाभ्यासों का वर्णन निम्नलिखित इस प्रकार है:

 

चयनित योगाभ्यास:

क्रम सांख्

अभ्यास

समयावधि

1

यौगिक सूक्ष्म व्यायाम

 

स्कंध चक्र] चालन

2 मिनट

 

ग्रीवा संचालन

3 मिनट

2

आसन क्रमानुसार-

 

गोमुखासन] वियोगासना

2&2 मिनट

 

मकरासन

1-5 मिनट

 

उष्ट्रासन] मार्जरी आसन

2&2 मिनट

 

बालासन

1-5 मिनट

 

सरल धनुरासन] सर्पासन

2&2 मिनट

 

मत्स्य क्रीड़ासन

1-5 मिनट

 

मर्कटासन

3 मिनट

 

शवासन 

2 मिनट

3

प्राणायाम

 

नाड़ी शोधन प्राणायाम

5 मिनट

 

भ्रामरी प्राणायाम

4 मिनट

4

मुद्रा हस्त मुद्रा

 

वायु मुद्रा

5 मिनट

 

अपान वायु मुद्रा

5 मिनट

5

ध्यान

 

योग निद्रा

5 मिनट

 

 

 

निष्कर्ष:

निष्कर्ष यह निकलता है कि सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस में ग्रीवा की जकड़न को यौगिक सूक्ष्म व्यायाम लचीलेपन को बढ़ाकर आराम दिलाते हैं आसन मांसपेशियों के संकुचन और तनाव को कम करता है। प्राणायाम विकृत अंगों में नयी उर्जा का प्रवाह प्रसारित करता है] जिससे उन अंगो में रक्त का प्रवाह सुगमता पूर्वक होता है तथा उन अंगो में एक नयी ऊर्जा] चेतना प्रवाहित होती है। योग और प्राणायाम के साथ हस्त मुद्रा करने से दोगुना लाभ मिलता है। हमारी उंगलियों की नसें शरीर के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी होती हैं] हस्त मुद्रा द्वारा इनपर प्रेशर डालकर शरीर का हर हिस्सा निरोगी रखा जा सकता है। ध्यान के सकारात्मक परिणाम होते हैं यह तनाव को कम कर] आत्मविश्वास में सुधार तथा प्रदर्शन की क्षमता में वृद्धि करता है।

 

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस को रोकने के लिए कुछ अन्य तरीके निम्न इस प्रकार हैं:

·         बहुत भारी वजन उठाने से बचें।

·         गर्दन को आराम देने के लिए काम के बीच में थोड़ा&थोड़ा ब्रेक लेते रहें।

·         बैठने और सोने की स्थति में शरीर का पोस्चर ठीक रखे।

·         लेटते समय करवट लेकर लेटना सबसे अच्छा है। चेहरे के बल सोने से बचें।

·         सर्वाइकल वाले क्षेत्र की तिल के तेल से हल्के हाथों से मालिस करे] तिल का तेल जोड़ों मांसपेशियों के लिए काफी फायदेमंद होता है।

·         हरी पत्तेदार सब्जियां] फल] हरी सब्जियों का सलाद और स्प्राउट्स लें।

·         खाद्य पदार्थों में जंक&फूड से बचें।

 

संदर्भ:

1.        सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस] ऐसे आएगा काबू में। याहू जागरण। हिन्दी। १८ फरवरी] २००८। डॉ॰ पंकज भारती] होलिस्टिक फिजीशियन

2.        Ask Apollo- yourhealthonlinehttps://healthlibrary.askapollo.com/everything-you-need-to-know-about-cervical-spondylitis/

3.        https://www.researchgate.net/publication/340871919_CERVICAL_SPONDYLOSIS_-CAUSES_AND_REMEDIAL_MEASURES

4.        https://www.patrika.com/lucknow-news/cervical-spondylitis-know-how-disease-is-6714413/

5.        https://www.allresearchjournal.com/archives/?year=2021&vol=7&issue=2&part=D&ArticleId=8263

6.        https://hindi.webdunia.com/article/yoga-articles

7.        स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध] योग पब्लिकेशन ट्रस्ट] मुंगेर बिहार

8.        संपूर्ण योग विद्या] राजीव जैन त्रिलोक मंजुल पब्लिशिंग हाउस] अंसारी रोड] दरियागंज] नई दिल्ली।

9.        स्वामी निरंजनानंद सरस्वती] घेरण्ड संहिता महर्षि घेरण्ड की योग शिक्षा पर भाष्य योग पब्लिकेशन ट्रस्ट] मुंगेर बिहार।

10.     आचार्य बालकृष्ण] दैनन्दिन योगाभ्यासक्रम] दिव्य प्रकाशन पतंजलि योगपीठ] हरिद्वार] उत्तराखंड।

11.     योग साधना एवं योग चिकित्सा रहस्य] स्वामी रामदेव] दिव्य प्रकाशन पतंजलि योगपीठ] हरिद्वार] उत्तराखंड।

12.     रोग और योग] डॉक्टर स्वामी कर्मानंद सरस्वती] प्रत्यक्ष मार्गदर्शन स्वामी सत्यानंद सरस्वती] योग पब्लिकेशन ट्रस्ट] मुंगेर बिहार।

13.     डॉ पी डी शर्मा योगासन-प्राणायाम कीजिए और निरोगी रहिए] नवनीत पब्लिकेशंस इंडिया लिमिटेड] नवनीत हाउस] भवानी शंकर रोड] दादर] मुंबई महाराष्ट्र।

14.     डॉ बृज भूषण गोयल] प्राकृतिक स्वास्थ्य एवं योग] स्टर्लिंग पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड] ओखला इंडस्ट्रियल एरिया फेज&2 नई दिल्ली

15.     स्वामी सत्यानंद सरस्वती] ध्यान तंत्र के आलोक में] योग पब्लिकेशन ट्रस्ट] मुंगेर बिहार

16.     डॉ अरुण कुमार साव] योग चिकित्सा सिद्धांत व्यवहार चौखंभा ओरिएंटलिया] दिल्ली।

17.     चित्र& स्वामी सत्यानंद सरस्वती] आसन प्राणायाम मुद्रा बंध] योग पब्लिकेशन ट्रस्ट] मुंगेर बिहार। योग साधना एवं योग चिकित्सा रहस्य] स्वामी रामदेव] दिव्य प्रकाशन पतंजलि योगपीठ] हरिद्वार] उत्तराखंड। Dreamstime, Adobe stock etc.

 

 

 

 

Received on 08.10.2022         Modified on 17.11.2022

Accepted on 20.12.2022         © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2022; 10(3):111-118.